
What parents should not say to their child: पेरेंटिंग को दुनिया का सबसे मुश्किल काम कहना गलत नहीं होगा। माता-पिता का हर शब्द और हर क्रिया उनके बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है। बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए माता-पिता को बहुत समझदारी और धैर्य से काम लेना होता है। बच्चों के व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के निर्माण में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है।
लेकिन कई बार पेरेंट्स अनजाने में ऐसी बातें कह जाते हैं, जो बच्चों के आत्मसम्मान और भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं। ये बातें उनके कोमल मन पर गहरा असर छोड़ती हैं, और उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। यह लेख माता-पिता को उनके शब्दों और व्यवहार की जिम्मेदारी को समझाने के लिए लिखा गया है। यहां हम चर्चा करेंगे उन गलतियों की, जिन्हें पेरेंट्स को टालने की कोशिश करनी चाहिए ताकि बच्चों का आत्मसम्मान और मानसिक विकास सही दिशा में हो।
पेरेंट्स की वे बातें जो बच्चों का दिल तोड़ देती हैं
1. “मैंने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किया”
यह बात अक्सर पेरेंट्स गुस्से या झगड़े के दौरान कह देते हैं।
- प्रभाव: यह बच्चे को ऐसा महसूस करवा सकता है कि वह अपने माता-पिता के प्रति कृतघ्न है।
- सही दृष्टिकोण: अपने बच्चों से इस बात की अपेक्षा न करें कि वे आपकी सभी कुर्बानियों को समझें। उनकी उम्र और अनुभव उन्हें यह सब समझने नहीं देता।
2. “तुम बहुत जल्दी बुरा मान जाते हो”
बच्चों को समय और अनुभव के साथ चीजें समझ में आती हैं।
- प्रभाव: ऐसी बातें बच्चों को महसूस करवा सकती हैं कि उनकी भावनाओं का कोई महत्व नहीं है।
- सही दृष्टिकोण: उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना उचित नहीं है, लेकिन इसे प्यार से कहें।
3. “ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं है”
बच्चों के छोटे-छोटे प्रयास उनके लिए बड़े होते हैं।
- प्रभाव: यह बच्चों की मेहनत और प्रयास को कमतर दिखाता है।
- सही दृष्टिकोण: उनके हर प्रयास की सराहना करें। यह उन्हें और अच्छा करने के लिए प्रेरित करेगा।
4. “तुम किसी काम के नहीं हो”
यह सबसे अधिक नुकसानदेह वाक्य है जो माता-पिता बच्चों से कह सकते हैं।
- प्रभाव: यह बच्चों के आत्मविश्वास को पूरी तरह से तोड़ सकता है और उनके मन में हीन भावना पैदा कर सकता है।
- सही दृष्टिकोण: उनकी असफलताओं पर ध्यान देने के बजाय, उन्हें सकारात्मक तरीके से सुधारने की कोशिश करें।
5. “तुम ऐसा कभी नहीं बन सकते”
बच्चों के आत्मविश्वास का निर्माण उनके माता-पिता से ही होता है।
- प्रभाव: यह वाक्य बच्चों को यह विश्वास दिला सकता है कि वे किसी भी चीज़ में असफल ही रहेंगे।
- सही दृष्टिकोण: उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि वे किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, अगर वे कड़ी मेहनत और लगन से काम करें।
पेरेंट्स को क्यों ध्यान रखना चाहिए अपनी बातों पर?
1. बच्चों का मानसिक विकास:
बच्चों का दिमाग एक स्पंज की तरह होता है। वे हर बात को बहुत गहराई से महसूस करते हैं। माता-पिता के नकारात्मक शब्द बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।
2. सकारात्मक माहौल का निर्माण:
बच्चे तभी आगे बढ़ सकते हैं, जब उनके आस-पास का माहौल सकारात्मक हो। माता-पिता की भाषा और व्यवहार बच्चों को आत्मनिर्भर और खुशहाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. बेहतर संबंध:
बच्चों के साथ स्वस्थ संवाद माता-पिता और बच्चों के बीच एक मजबूत और समझदारी भरा रिश्ता बनाता है।
बच्चों से बात करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- प्यार और धैर्य से बात करें:
गुस्से में भी बच्चों से शांति से बात करने की कोशिश करें। - प्रशंसा करें:
बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की भी तारीफ करें। - सकारात्मक भाषा का उपयोग करें:
हमेशा उनकी असफलताओं पर ध्यान देने के बजाय उनके प्रयासों को सराहें। - उनकी भावनाओं को समझें:
बच्चों की भावनाओं को महत्व दें और उन्हें साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. बच्चों से बात करते समय किन शब्दों से बचना चाहिए?
बच्चों से बात करते समय “तुम किसी काम के नहीं हो,” “तुम ऐसा कभी नहीं बन सकते,” और “मैंने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किया” जैसे शब्दों से बचना चाहिए।
2. अगर बच्चे गलती करें तो माता-पिता को क्या करना चाहिए?
बच्चों को प्यार से उनकी गलती का एहसास कराएं और उन्हें सुधारने का मौका दें।
3. बच्चों का आत्मविश्वास कैसे बढ़ाया जा सकता है?
बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करें, उनके प्रयासों को सराहें और उन्हें प्रोत्साहित करें।
4. नकारात्मक बातें बच्चों पर क्या प्रभाव डालती हैं?
नकारात्मक बातें बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं, जिससे उनमें हीन भावना पैदा हो सकती है।
5. बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद कैसे बनाया जा सकता है?
बच्चों के साथ प्यार और धैर्य से बात करें, उनकी भावनाओं को समझें और सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करें .
माता-पिता के शब्द बच्चों के व्यक्तित्व, मानसिकता, और आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव डालते हैं। बच्चों के साथ संवाद करते समय माता-पिता को अपनी भाषा और व्यवहार को सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए। बच्चों के साथ प्यार और धैर्य से पेश आना उनके आत्मविश्वास और भविष्य के निर्माण में मदद करता है।
याद रखें, बच्चे आपकी परछाई होते हैं। जैसा आप उन्हें सिखाएंगे, वैसा ही वे बनेंगे। इसलिए अपने शब्दों और व्यवहार को सकारात्मक और प्रेरणादायक बनाएं।
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