प्रेगनेंसी में मिर्गी का असर शिशु पर होता है? डॉक्टर की राय जानें 

क्या मिर्गी की बीमारी से गर्भस्थ शिशु को खतरा हो सकता है? क्या दवाएँ शिशु को नुकसान पहुँचा सकती हैं? डॉक्टरों की राय के साथ जानें वे ज़रूरी सावधानियाँ, जो मिर्गी से ग्रसित महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बरतनी चाहिए।

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By Nutan Bhatt

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प्रेगनेंसी में मिर्गी का असर शिशु पर होता है? डॉक्टर की राय जानें 

मिर्गी-Epilepsy एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जो बार-बार दौरे (Seizures) पड़ने का कारण बनता है। जब कोई महिला मिर्गी से पीड़ित होती है और गर्भवती होती है, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह स्थिति गर्भस्थ शिशु पर असर डाल सकती है। गर्भावस्था के दौरान मिर्गी के दौरे माँ और शिशु दोनों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं, क्योंकि इससे भ्रूण को ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो सकती है और समय से पहले प्रसव या जन्म दोष जैसी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

मिर्गी का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर

गर्भावस्था के दौरान मिर्गी के दौरे माँ के रक्तचाप में अचानक परिवर्तन ला सकते हैं, जिससे शिशु की हृदय गति प्रभावित हो सकती है। मिर्गी के गंभीर दौरे भ्रूण को ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) का शिकार बना सकते हैं, जिससे उसके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, गर्भवती महिला द्वारा ली जाने वाली एंटी-एपिलेप्टिक दवाएँ (Anti-Epileptic Drugs – AEDs) भी कुछ मामलों में शिशु में जन्मजात विकार (Congenital Defects) का खतरा बढ़ा सकती हैं।

हालांकि, यह भी सच है कि अनियंत्रित मिर्गी के दौरे शिशु के लिए अधिक हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए, डॉक्टर आमतौर पर ऐसी दवाएँ निर्धारित करते हैं जिनसे माँ और शिशु दोनों को कम से कम जोखिम हो। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड का सेवन करने से जन्म दोषों की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय

डॉक्टरों का मानना है कि मिर्गी से ग्रसित महिलाओं के लिए गर्भधारण से पहले सही योजना बनाना बेहद महत्वपूर्ण है। डॉ. सीमा गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, कहती हैं, “अगर कोई महिला मिर्गी से पीड़ित है और गर्भधारण की योजना बना रही है, तो उसे पहले ही अपने न्यूरोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इससे उसकी दवा की खुराक को इस तरह समायोजित किया जा सकता है कि यह माँ और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित हो।”

डॉ. अरुण मिश्रा, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, बताते हैं, “गर्भवती महिलाओं को तनाव से बचना चाहिए और नियमित रूप से नींद लेनी चाहिए, क्योंकि नींद की कमी भी मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकती है। इसके अलावा, महिलाओं को संतुलित आहार और विटामिन सप्लीमेंट्स लेने की भी सलाह दी जाती है, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।”

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(FAQs)

1. क्या मिर्गी की बीमारी के कारण गर्भावस्था में कोई विशेष जटिलताएँ हो सकती हैं?
हाँ, मिर्गी के दौरे समय से पूर्व प्रसव, भ्रूण की ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा, और कुछ मामलों में गर्भपात का कारण बन सकते हैं। डॉक्टर की निगरानी में सही दवाओं और सावधानियों के साथ जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

2. क्या मिर्गी की दवाएँ शिशु पर असर डाल सकती हैं?
कुछ एंटी-एपिलेप्टिक दवाएँ जन्मजात विकारों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं, लेकिन बिना दवा के रहना माँ और शिशु दोनों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर के परामर्श से सुरक्षित दवाएँ ली जा सकती हैं।

3. क्या मिर्गी से पीड़ित महिला के लिए सामान्य डिलीवरी संभव है?
हाँ, अगर गर्भावस्था के दौरान दौरे नियंत्रित हैं और कोई अन्य जटिलता नहीं है, तो सामान्य प्रसव संभव है। हालाँकि, कुछ मामलों में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) की सलाह दे सकते हैं।

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Nutan Bhatt
मैं नूतन भट्ट हूँ, शिवांग की माँ और mumbabysparsh.com की संस्थापक। एक नई माँ के रूप में, मैंने अपनी मातृत्व यात्रा के दौरान सीखे गए सबक और अनुभवों को साझा करने का फैसला किया। मेरा लक्ष्य है अन्य नई माओं को प्रेरित करना और उनकी मदद करना, ताकि वे इस चुनौतीपूर्ण और खुशियों भरी यात्रा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें। मेरे लेख बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, और मातृत्व के सुखद अनुभवों पर केंद्रित हैं, सभी को हिंदी में सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है। मैं आशा करती हूँ कि मेरे विचार और सुझाव आपकी मातृत्व यात्रा को और अधिक खुशहाल और सुगम बनाने में मदद करेंगे।

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