इस उम्र के बाद भी पेरेंट्स के साथ सो रहा बच्चा तो नहीं सीख पाएगा ये 5 चीजें, किस उम्र में कर देना चाहिए बंद?

Bacchon ko sath sulane ke nuksan:10 साल की उम्र के बाद बच्चों को अलग सोने की आदत डालना उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है। इससे वे आत्मनिर्भर बनते हैं, अपनी प्राइवेसी की समझ विकसित करते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। माता-पिता को धीरे-धीरे बच्चों को अलग सोने के लिए तैयार करना चाहिए, जिससे यह बदलाव उनके लिए सहज हो सके

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By Nutan Bhatt

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bachon ko kab se alag bistar par sulana chahiye

Bacchon ko sath sulane ke nuksan: बच्चों को बचपन से ही माता-पिता अपने पास सुलाते हैं। यह न केवल माता-पिता बल्कि बच्चों के लिए भी आरामदायक होता है, क्योंकि यह सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव की भावना को बढ़ाता है। हालांकि, एक समय ऐसा आता है जब बच्चे को अलग सोने की आदत डालनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, 10 साल की उम्र के बाद बच्चों को अलग बिस्तर पर सोने की आदत डालनी चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भरता और अन्य महत्वपूर्ण जीवन कौशल सीख सकें।

अक्सर माता-पिता इस बदलाव को लेकर चिंतित रहते हैं कि क्या उनका बच्चा अकेले सो पाएगा या नहीं। लेकिन यह निर्णय बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। यदि बच्चे को इस उम्र के बाद भी माता-पिता के साथ सुलाया जाता है, तो इससे कुछ आवश्यक जीवन कौशल सीखने में देरी हो सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि बच्चों को 10 साल की उम्र के बाद अलग सुलाने (bachon ko kab se alag bistar par sulana chahiye) से क्या फायदे होते हैं और यह उनके विकास में कैसे मदद करता है।

मुख्य बिंदु

बिंदुफायदे
प्राइवेसी की समझबच्चों को अपनी व्यक्तिगत सीमाओं और निजता का अहसास होता है।
अकेलेपन का अनुभवबच्चे मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं और आत्मनिर्भरता सीखते हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धिअकेले सोने से बच्चों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास विकसित होता है।
शारीरिक विकास में मददकिशोरावस्था के दौरान बच्चे अपने शरीर में होने वाले बदलावों को बेहतर समझते हैं।
डर को दूर करने में मददअलग सोने से बच्चे का आत्म-नियंत्रण और डर पर काबू पाने की क्षमता बढ़ती है।

1. प्राइवेसी की समझ विकसित होती है

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे प्राइवेसी (Privacy) का अहसास होना जरूरी है। 10 साल की उम्र के बाद बच्चे अपनी व्यक्तिगत सीमाओं को समझने लगते हैं और यह जरूरी है कि माता-पिता भी उन्हें यह महसूस कराएं कि उनकी एक निजी जगह होनी चाहिए।

कैसे मदद मिलती है?

  • बच्चों को उनके निजी स्थान (Personal Space) की अहमियत समझने में मदद मिलती है।
  • वे अपनी भावनाओं और विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करना सीखते हैं।
  • उन्हें अपने माता-पिता से संवाद करने की आदत पड़ती है, जिससे परिवार में एक स्वस्थ रिश्ता बना रहता है।

2. अकेलेपन का अनुभव जरूरी है

अकेलेपन का अनुभव (Experience Loneliness) बच्चों के मानसिक विकास के लिए जरूरी होता है। हर बच्चे को यह सीखना चाहिए कि अकेले रहने में कोई बुराई नहीं है और यह आत्मनिर्भरता विकसित करने का एक तरीका है।

कैसे मदद मिलती है?

  • बच्चे अधिक स्वतंत्र बनते हैं और अपने फैसले खुद लेना सीखते हैं।
  • आत्म-नियंत्रण (Self-Control) विकसित होता है।
  • बच्चे अपने आप से समय बिताने का महत्व समझते हैं, जिससे वे अधिक आत्मविश्वासी बनते हैं।
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3. आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

अगर बच्चे माता-पिता के साथ सोते रहते हैं, तो वे सुरक्षा पर अधिक निर्भर हो जाते हैं। जब बच्चा अलग सोना शुरू करता है, तो उसका आत्मविश्वास (Confidence) बढ़ता है और वह छोटी-छोटी चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना बंद कर देता है।

कैसे मदद मिलती है?

  • बच्चे खुद के फैसले लेने लगते हैं।
  • आत्म-निर्भरता (Independence) बढ़ती है।
  • समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित होती है।

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4. अपने शरीर की समझ होती है

10 साल की उम्र के बाद बच्चों में शारीरिक और मानसिक बदलाव होने लगते हैं। यह किशोरावस्था (Puberty) की शुरुआत होती है और इस दौरान बच्चों को अपने शरीर के बारे में समझने और स्वीकार करने की जरूरत होती है।

कैसे मदद मिलती है?

  • बच्चे अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर जागरूक होते हैं।
  • वे अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) पर अधिक ध्यान देने लगते हैं।
  • किशोरावस्था से जुड़ी सामान्य बातों को समझने और अपनाने में आसानी होती है।

5. डर को दूर करने में मदद मिलती है

अधिकतर बच्चे अंधेरे से, अकेले रहने से या बुरे सपने से डरते हैं। लेकिन अगर उन्हें अलग सोने की आदत डाल दी जाए, तो वे इन सभी डर से उबर सकते हैं।

कैसे मदद मिलती है?

  • बच्चे का आत्म-नियंत्रण (Self-Control) विकसित होता है।
  • वे डर से निपटने के तरीके सीखते हैं।
  • माता-पिता पर निर्भरता कम होती है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ती है।

बच्चों को अलग सोने की आदत कैसे डालें?

अगर आपका बच्चा माता-पिता के साथ सोने का आदी है, तो उसे अलग सोने के लिए प्रेरित (When Should Child Sleep In Their Own Bed) करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  1. धीरे-धीरे बदलाव करें – अचानक अलग सुलाने की बजाय, पहले बच्चे का बिस्तर माता-पिता के कमरे में रखें और फिर धीरे-धीरे अलग कमरे में शिफ्ट करें।
  2. बच्चे को सुरक्षा का एहसास कराएं – उन्हें बताएं कि अलग सोना कोई डरावनी बात नहीं है और माता-पिता हमेशा उनके पास हैं।
  3. रात की दिनचर्या बनाएं – सोने से पहले कहानी सुनाएं, हल्की रोशनी रखें और शांत वातावरण बनाएं।
  4. बच्चे की पसंद के बिस्तर और सामान का उपयोग करें – उनके लिए मनपसंद बेडशीट, तकिए और खिलौने खरीदें, जिससे वे अपने कमरे में सुरक्षित महसूस करें।
  5. प्रोत्साहन दें – अगर बच्चा पूरे हफ्ते अलग सोता है, तो उसे किसी अच्छे इनाम (Reward) से प्रोत्साहित करें।

निष्कर्ष

बच्चों को 10 साल की उम्र के बाद अलग सोने की आदत डालना उनके मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। इससे उन्हें प्राइवेसी की समझ, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, और अपने शरीर की पहचान करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह बदलाव धीरे-धीरे करना चाहिए और बच्चे को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। माता-पिता को बच्चों के डर को समझकर उन्हें सही मार्गदर्शन देना चाहिए, जिससे वे अकेले सोने की आदत को आसानी से अपना सकें।

Author
Nutan Bhatt
मैं नूतन भट्ट हूँ, शिवांग की माँ और mumbabysparsh.com की संस्थापक। एक नई माँ के रूप में, मैंने अपनी मातृत्व यात्रा के दौरान सीखे गए सबक और अनुभवों को साझा करने का फैसला किया। मेरा लक्ष्य है अन्य नई माओं को प्रेरित करना और उनकी मदद करना, ताकि वे इस चुनौतीपूर्ण और खुशियों भरी यात्रा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें। मेरे लेख बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, और मातृत्व के सुखद अनुभवों पर केंद्रित हैं, सभी को हिंदी में सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है। मैं आशा करती हूँ कि मेरे विचार और सुझाव आपकी मातृत्व यात्रा को और अधिक खुशहाल और सुगम बनाने में मदद करेंगे।

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