Parenting Tips: दिन-ब-दिन गुस्सैल और एग्रेसिव होता जा रहा है बच्चा, तो माता-पिता ऐसे बनाएं उसे शांत और समझदार

बच्चों का गुस्सा और आक्रामक व्यवहार माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन सही दृष्टिकोण और धैर्य के साथ इसे नियंत्रित किया जा सकता है। परिवार का सकारात्मक माहौल, बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना, और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करना इस समस्या के समाधान में मदद कर सकता है।

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By Nutan Bhatt

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bacho ko shant or samajdaar kese banaye

Parenting Tips: आज के दौर में बच्चों में गुस्सैल और आक्रामक व्यवहार की समस्या बढ़ती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ झगड़ना या हिंसक हो जाना, ये सभी संकेत हैं कि बच्चा अपनी भावनाओं को संभालने में संघर्ष कर रहा है। यह समस्या न केवल बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार के माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।

माता-पिता के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि बच्चों के गुस्से और आक्रामकता के पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं। इसके साथ ही, यह भी जरूरी है कि वे अपने बच्चों को गुस्से को प्रबंधित करना सिखाएं। सही समय पर समझदारी से लिया गया कदम बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इस लेख में, हम बच्चों में गुस्से (bacho ko shant or samajdaar kese banaye) के प्रमुख कारण, इसे शांत करने के प्रभावी तरीके और इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण सलाहों पर चर्चा करेंगे।

बच्चों में गुस्से के कारण

बच्चों में गुस्से और आक्रामकता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं:

1. परिवार का माहौल

माता-पिता के बीच लगातार झगड़े, घरेलू तनाव या बच्चे पर बहुत ज्यादा पढ़ाई या प्रदर्शन का दबाव डालना बच्चों में गुस्से का कारण बन सकता है। अगर बच्चे को यह महसूस होता है कि उसका घर का माहौल सुरक्षित और स्थिर नहीं है, तो यह उसकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकता है।

2. सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम का अधिक इस्तेमाल

आजकल बच्चे सोशल मीडिया और स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं। इससे उनके जीवन में अकेलापन, चिंता और तनाव बढ़ सकता है। इन सबका असर उनकी भावनात्मक स्थिति पर पड़ता है और वे गुस्सैल हो जाते हैं।

3. अनुशासन की कमी

अगर बच्चों को बचपन से ही अनुशासन नहीं सिखाया जाता है, तो वे अपनी भावनाओं को संभालने में संघर्ष करते हैं। वे गुस्से में अपनी भावनाओं को व्यक्त करने लगते हैं, क्योंकि उनके पास और कोई तरीका नहीं होता।

4. मनोवैज्ञानिक समस्याएं

कुछ बच्चों में गुस्सा किसी मनोवैज्ञानिक समस्या जैसे कि एडीएचडी (Attention Deficit Hyperactivity Disorder), ऑटिज्म या अन्य किसी मानसिक विकार के कारण हो सकता है। इस स्थिति में बच्चों को समझना और उनका सही इलाज कराना बेहद जरूरी है।

बच्चों का गुस्सा शांत करने के तरीके

बच्चों को शांत करने और उनके गुस्से को नियंत्रित करने के लिए माता-पिता को समझदारी और धैर्य से काम लेना चाहिए। यहां कुछ प्रभावी तरीके दिए गए हैं:

1. बच्चे को समय दें

बच्चों को समय देना बेहद जरूरी है। उनके साथ खेलें, बातचीत करें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। जब बच्चे को यह लगेगा कि आप उनकी परवाह करते हैं, तो वे अपने मन की बात आपके साथ साझा करेंगे।

2. शांत माहौल दें

घर का माहौल शांत और सकारात्मक बनाएं। बच्चों को तनावमुक्त माहौल दें, जहां वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें। अगर घर का माहौल सकारात्मक होगा, तो बच्चों में गुस्से की प्रवृत्ति कम हो जाएगी।

3. समझाने का प्रयास करें

जब बच्चा गुस्सा करे, तो उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। उसे सिखाएं कि गुस्सा करना समस्या का समाधान नहीं है। उसकी समस्याओं का हल निकालने में उसकी मदद करें।

4. सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं

बच्चों के अच्छे व्यवहार पर उनकी तारीफ करें। उन्हें इनाम दें, ताकि वे अच्छा व्यवहार करना जारी रखें। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से बच्चों में आत्मविश्वास और अच्छा व्यवहार विकसित होता है।

5. ध्यान और योग का सहारा लें

ध्यान और योग बच्चों को शांत रहने और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सिखा सकते हैं। बच्चों को सरल ध्यान और सांस लेने की तकनीकें सिखाएं, जिससे वे गुस्से के समय खुद को शांत कर सकें।

6. प्रोफेशनल की मदद लें

अगर बच्चे का गुस्सा बहुत ज्यादा हो और आप उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहे हों, तो किसी मनोवैज्ञानिक या चाइल्ड काउंसलर से सलाह लें। वे बच्चे की समस्या को गहराई से समझकर उसका समाधान बता सकते हैं।

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बच्चों में गुस्से को कम करने के लिए माता-पिता क्या कर सकते हैं?

  1. अच्छे रोल मॉडल बनें:
    बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार को बहुत ध्यान से देखते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के सामने शांत और सकारात्मक व्यवहार करें।
  2. पढ़ाई और खेल का संतुलन:
    बच्चों पर पढ़ाई का अधिक दबाव न डालें। उन्हें खेलने का पर्याप्त समय दें, ताकि उनका तनाव कम हो सके।
  3. रूटीन बनाएं:
    बच्चों के लिए एक नियमित दिनचर्या बनाएं, जिसमें खेल, पढ़ाई और आराम का समय हो। इससे बच्चे को अपनी दिनचर्या में स्थिरता का अनुभव होगा।
  4. खाने-पीने पर ध्यान दें:
    संतुलित और पौष्टिक आहार बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। जंक फूड से बचें और बच्चों के आहार में फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल करें।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. बच्चों का गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
बच्चों का गुस्सा बढ़ने के पीछे तनावपूर्ण पारिवारिक माहौल, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल और अनुशासन की कमी जैसे कारण हो सकते हैं।

2. क्या गुस्सा किसी मानसिक समस्या का संकेत हो सकता है?
हाँ, कुछ मामलों में गुस्सा एडीएचडी, ऑटिज्म या अन्य मानसिक विकार का संकेत हो सकता है।

3. गुस्से को नियंत्रित करने के लिए बच्चों को क्या सिखाना चाहिए?
बच्चों को ध्यान और योग जैसी तकनीकें सिखाएं, जो उन्हें शांत रहने और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करेंगी।

4. क्या बच्चों को डांटना सही है?
बच्चों को डांटने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके बजाय, उन्हें समझने और सही रास्ता दिखाने की कोशिश करें।

5. बच्चों के गुस्से के लिए किस विशेषज्ञ से संपर्क करें?
अगर बच्चे का गुस्सा अधिक हो, तो किसी चाइल्ड काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से संपर्क करें।

Author
Nutan Bhatt
मैं नूतन भट्ट हूँ, शिवांग की माँ और mumbabysparsh.com की संस्थापक। एक नई माँ के रूप में, मैंने अपनी मातृत्व यात्रा के दौरान सीखे गए सबक और अनुभवों को साझा करने का फैसला किया। मेरा लक्ष्य है अन्य नई माओं को प्रेरित करना और उनकी मदद करना, ताकि वे इस चुनौतीपूर्ण और खुशियों भरी यात्रा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें। मेरे लेख बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, और मातृत्व के सुखद अनुभवों पर केंद्रित हैं, सभी को हिंदी में सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है। मैं आशा करती हूँ कि मेरे विचार और सुझाव आपकी मातृत्व यात्रा को और अधिक खुशहाल और सुगम बनाने में मदद करेंगे।

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