
शिशु देखभाल में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है समय पर दूध पिलाना (Baby Feeding)। विशेष रूप से नवजात शिशुओं के लिए, हर दो से तीन घंटे में दूध देना आवश्यक होता है, लेकिन जब बच्चा गहरी नींद में होता है, तो माता-पिता के लिए यह निर्णय कठिन हो जाता है कि क्या उसे जगाया जाए या नहीं। सोते हुए बच्चे को दूध पिलाने के लिए सही तकनीक जानना जरूरी है, क्योंकि यदि समय पर दूध न मिले, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
बच्चे को धीरे और सुरक्षित तरीके से जगाएं
शिशु की नींद को बाधित किए बिना उसे जगाना एक कला है। सोते हुए बच्चे को दूध पिलाने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है कि उसे प्यार से और धीरे-धीरे जगाया जाए। इसके लिए उसके पैरों और हथेलियों पर हल्की मालिश करें या धीरे-धीरे कपड़े खोलें ताकि हल्की ठंडक महसूस होने पर वह खुद जाग जाए। कभी भी बच्चे को जोर से हिलाना या आवाज देकर अचानक से नहीं जगाना चाहिए क्योंकि इससे उसका तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है।
दूध पिलाने से पहले बच्चे को सतर्क करना क्यों जरूरी है
जब बच्चा पूरी तरह सो रहा हो, तो उसका निगलने और चूसने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में उसे दूध पिलाना खतरनाक हो सकता है क्योंकि दूध गलती से सांसनली में जा सकता है, जिससे घातक स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चा पहले सतर्क हो, आंखें खोले, हल्का शरीर हिले और तभी उसे दूध पिलाया जाए।
समय पर दूध न पिलाने से होने वाले नुकसान
दूध पिलाने का अंतराल यदि लंबे समय तक बना रहे, तो नवजात का वजन तेजी से घट सकता है। यह विकास में बाधा डालता है और उसके इम्यून सिस्टम को भी कमजोर करता है। समय पर स्तनपान न कराने से मां का दूध कम हो सकता है, जिससे आगे चलकर शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इसके अलावा बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और उसकी नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
बोतल से दूध पिलाने में रखें सावधानी
अगर शिशु को बोतल से दूध पिलाया जा रहा है, तो साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। बोतल की निप्पल यदि ठीक से सैनिटाइज न की गई हो, तो शिशु को संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, लेटे हुए स्थिति में बोतल से दूध देना भी खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इससे फॉर्मूला मिल्क (Formula Milk) फेफड़ों में जा सकता है, जो न्यूमोनिया जैसे गंभीर रोग का कारण बन सकता है।
माँ के लिए भी है यह जिम्मेदारी
माँ के लिए यह जानना जरूरी है कि शिशु की भूख के संकेत क्या हैं। बच्चा जब होंठ चाटता है, मुंह में हाथ डालता है या शरीर में हलचल करता है, तो वह भूख का संकेत दे रहा होता है। ऐसे संकेत मिलते ही उसे जगाकर दूध देना चाहिए। खासकर जन्म के पहले छह हफ्तों में दूध पिलाने का पैटर्न शरीर में दूध के उत्पादन को निर्धारित करता है, इसलिए यह समय ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
बच्चों को 1 दिन में कितने डायपर पहनाने चाहिए? यहां जाने पूरी जानकरी विस्तार से
बेटी ने अगर जाना शुरू कर दिया कॉलेज, तो ये 5 बातें जरूर सिखा दें पेरेंट्स जीवन में आएंगी बहुत काम
विशेषज्ञों के सुझाए तरीके
शिशु विकास विशेषज्ञ डॉ. अर्चना तिवारी बताती हैं:
“सोते हुए बच्चे को जब दूध पिलाना हो, तो सबसे पहले उसका डायपर बदलें, इससे हलचल होगी और वह हल्का जाग सकता है। इसके अलावा, उसके पैरों पर हल्की मालिश, सिर पर प्यार से सहलाना और धीरे-धीरे बातें करना जैसे ‘उठो बाबू’ जैसी आवाज़ें, बच्चे को आराम से जगा सकती हैं।”
लैक्टेशन कंसल्टेंट मंजरी पटेल का कहना है:
“कभी भी बच्चे को जोर से उठाकर या झटके देकर न जगाएं। इससे उसके न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर पड़ सकता है। सबसे अच्छा तरीका है बच्चे की बॉडी लैंग्वेज को समझना — जैसे होंठ चाटना, हलचल करना या मुंह में हाथ डालना — ये संकेत हैं कि बच्चा दूध के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों की राय स्पष्ट करती है कि सोते हुए बच्चे को दूध पिलाना आवश्यक तो है, लेकिन इसके लिए सही समय और तरीका बेहद जरूरी है। बच्चे को जबरदस्ती या सोते-सोते दूध न पिलाएं। उसे धीरे से जगाएं, संकेतों को समझें और फिर सुरक्षित रूप से स्तनपान या बोतल फीडिंग कराएं। यह न केवल शिशु के पोषण के लिए जरूरी है, बल्कि माता-पिता के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
FAQs
प्रश्न: क्या हर बार सोते हुए बच्चे को जगाकर दूध पिलाना जरूरी है?
उत्तर: हां, खासकर नवजात शिशुओं के लिए हर 2-3 घंटे में दूध पिलाना जरूरी होता है, भले ही वे सो रहे हों। लेकिन उन्हें पहले जागरूक अवस्था में लाना चाहिए।
प्रश्न: अगर बच्चा रातभर सोता रहे तो क्या नुकसान हो सकता है?
उत्तर: रातभर दूध न मिलने से शिशु का वजन घट सकता है और शरीर को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे विकास में रुकावट आती है।
प्रश्न: बोतल से दूध पिलाते समय क्या सावधानी रखें?
उत्तर: बोतल और निप्पल को उबालकर सैनिटाइज करें, और शिशु को हमेशा उठाकर दूध पिलाएं, लेटाकर कभी नहीं।
प्रश्न: क्या सिर्फ माँ का दूध पर्याप्त है?
उत्तर: जन्म के पहले छह महीने तक माँ का दूध ही शिशु के लिए सबसे उत्तम पोषण है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।