
बच्चों की परवरिश करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। उनकी शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास के साथ-साथ यह भी तय करना कि उन्हें कौन सी भाषा सिखानी चाहिए, माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती है। आज के दौर में जहां अंग्रेजी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, वहीं अपनी मातृभाषा को सिखाना भी बेहद जरूरी है। इस सवाल का जवाब खोजना कि बच्चों के भविष्य के लिए कौन सी भाषा ज्यादा जरूरी है, हर माता-पिता की चिंता बन चुका है।
पेरेंटिंग कोच और विशेषज्ञ हरप्रीत सिंह ग्रोवर ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी है। उनका मानना है कि बच्चों को एक साथ दो से तीन भाषाएं सिखाई जा सकती हैं। हालांकि, इसके लिए सही रणनीति और समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इस लेख में हम इस कंफ्यूजन को दूर करने की कोशिश करेंगे और यह समझाएंगे कि बच्चों के लिए मातृभाषा (bacho se english me baat kare ya maatrbhasha me) और अंग्रेजी दोनों का ज्ञान क्यों जरूरी है।
बच्चों को भाषा सिखाने की सही रणनीति
1. अंग्रेजी का महत्व
आज के समय में अंग्रेजी को एक वैश्विक भाषा (bacho se kis bhasa me baat kare) माना जाता है।
- क्यों जरूरी है अंग्रेजी?
- यह शिक्षा और करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और व्यापार की भाषा है।
- स्कूलों और इंटरव्यू में अंग्रेजी का उपयोग अनिवार्य हो गया है।
- कैसे सिखाएं?
- रोज एक घंटे बच्चों से अंग्रेजी में बात करें।
- बच्चों को अंग्रेजी किताबें और कहानियां पढ़ने की आदत डालें।
- बच्चों को अंग्रेजी के बेसिक शब्द और वाक्य सिखाएं।
2. मातृभाषा की भूमिका
मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सांस्कृतिक पहचान होती है।
- मातृभाषा क्यों जरूरी है?
- यह बच्चों को उनकी जड़ों, परिवार और समुदाय से जोड़ती है।
- यह बच्चों के भावनात्मक और सामाजिक विकास में मदद करती है।
- मातृभाषा में संवाद बच्चों के मस्तिष्क के विकास को गति देता है।
- कैसे सिखाएं?
- घर में बच्चों से केवल मातृभाषा में बात करें।
- बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने के लिए लोककथाएं और गीत सिखाएं।
- उन्हें अपनी मातृभाषा में कहानियां सुनाएं और बातचीत करें।

3. बच्चों को द्विभाषी बनाने के फायदे
- भाषाई कौशल में सुधार: बच्चे जल्दी से नई भाषाएं सीख सकते हैं।
- बौद्धिक विकास: द्विभाषी बच्चों का दिमाग अधिक सक्रिय और लचीला होता है।
- करियर में लाभ: द्विभाषी लोग अक्सर बेहतर करियर विकल्प पा सकते हैं।
मातृभाषा और अंग्रेजी सिखाने की रणनीति
शुरुआत में मातृभाषा पर जोर दें
बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता छोटी उम्र में अधिक होती है। इसलिए, उनके शुरुआती दिनों में मातृभाषा सिखाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंग्रेजी के लिए अलग समय तय करें
जब बच्चे अपनी मातृभाषा को ठीक से समझने लगें, तब अंग्रेजी सीखाने पर ध्यान दें। इसके लिए रोज एक घंटे का समय निर्धारित करें।
दोनों भाषाओं के बीच संतुलन बनाए रखें
बच्चों को द्विभाषी बनाना उनके लिए फायदेमंद है, लेकिन इसके लिए यह सुनिश्चित करें कि वे दोनों भाषाओं का समान रूप से अभ्यास करें।
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बच्चों को भाषा सिखाने के लिए टिप्स
- खेल-खेल में भाषा सिखाएं:
बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से भाषा सिखाना आसान होता है। - कहानियों का उपयोग करें:
बच्चों को कहानियां सुनाने से उनकी भाषा का विकास तेजी से होता है। - दोनों भाषाओं को शामिल करें:
एक समय में मातृभाषा और अंग्रेजी दोनों का उपयोग करें, जैसे एक भाषा में बात करें और दूसरी में उत्तर दें। - सकारात्मक माहौल बनाएं:
बच्चों को भाषा सिखाने के लिए प्रेरित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें।
बच्चों को मातृभाषा और अंग्रेजी दोनों का ज्ञान होना जरूरी है। मातृभाषा उनकी सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान को मजबूत बनाती है, जबकि अंग्रेजी उन्हें वैश्विक मंच पर संवाद और करियर के अवसर प्रदान करती है। पेरेंट्स को चाहिए कि वे दोनों भाषाओं के बीच संतुलन बनाए रखें और बच्चों को सही दिशा में बढ़ने में मदद करें।