नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए के नियमित रूप से मालिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। भारतीय संस्कृति में, नवजात शिशु की मालिश की परंपरा देखी जाती है और आजकल यह चिकित्सकों द्वारा भी संज्ञान में लाया जाता है। यह न केवल बच्चे के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, बल्कि यह मां-बच्चे के बीच एक सांत्वना और प्रेम का संबंध भी बढ़ाता है। बच्चे की रोजाना मालिश उनकी हड्डियों, मांसपेशियों, त्वचा, और संदर्भित अंगों के विकास को न केवल सहायक बनाती है बल्कि यह उन्हें सहायक चिकित्सकीय लाभ भी प्रदान करती है।
यदि नियमित रूप से रोजाना नवजात शिशु की मालिश की जाए तो इसके कई लाभ होते हैं। मालिश से बच्चे को आराम मिलता है और उनकी नींद में भी सुधार आता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, बेबी मसाज से शिशु का सही विकास होता है, हालांकि इस बारे में और अध्ययन की जरूरत है। इस लेख में हम आपको नवजात शिशु की मालिश कैसे करें इससे संबंधित सभी जानकारी प्रदान करेंगे, जिसके लिए आप लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।
कैसे करें नवजात शिशु की मालिश | Navjaat Shishu Ki Malish Kese Kare
नवजात बच्चे की मालिश न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मां-बच्चे के बीच एक अद्वितीय बंधन भी बनाती है। इसलिए, हर मां को अपने नवजात शिशु को नियमित रूप से मालिश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि बच्चे की मालिश कैसे की जाए और मालिश के लिए कैसे तेल का उपयोग किया जाए, हर मां को इसकी जानकारी नही होती है, ऐस में चलिए जानते हैं, क्या है मालिश का सही तरीका?
शिशु के लिए उपयुक्त तेल का चयन का चयन करें। यह तेल उनकी त्वचा को नरम और मुलायम बनाने में मदद करता है।
मालिश की तैयारी:
- सही समय चुनें: शिशु को तब मालिश करें जब वह आरामदायक और जागरूक हो। आमतौर पर भोजन के बाद एक घंटा या नहाने से पहले का समय सबसे अच्छा होता है।
- सही जगह चुनें: एक शांत, गर्म और आरामदायक जगह चुनें जहाँ शिशु आराम से लेट सके।
- मालिश का तेल: शिशु की त्वचा के लिए सौम्य और प्राकृतिक तेल का उपयोग करें, जैसे नारियल तेल, जैतून का तेल या बादाम का तेल।
नवजात शिशु मालिश का तरीका
नवजात शिशु की मालिश को हल्के हाथों से और धीरे-धीरे करें। इसे हल्की मालिश कहा जाता है और इससे बच्चे को चैंबर में आराम का अहसास होता है।
1. शिशु की मालिश की तैयारी:
सबसे पहले अपने नवजात शिशु को कम्फर्टेबल और अच्छे मूड में रखने के लिए, उसकी हाथें और पेट पर हल्का तेल लगाएं।
शिशु को इस प्रक्रिया को समझने में मदद के लिए धीरे-धीरे तेल लगाएं।
रोने या हाथ-पैर झटकने के लक्षण हो तो समझें कि वह तैयार नहीं है।
2. हाथों की मालिश:
आप अपने बी बच्चों के हाथों को पकड़कर उसकी हथेलियों से शुरू करें और हल्के हाथों से मालिश करें।
उसके हाथों के पिछले हिस्से से कलाई तक मालिश करें।
3. सीने और कंधों की मालिश:
शिशु के सीने और कंधों को धीरे-धीरे मालिश करें, शुरूआत सीने के नीचे से करते हुए।
4. पेट की मालिश
पेट की मालिश के लिए, सीने के नीचे से शुरू करें और धीरे-धीरे ऊपर की ओर जाएं।
बच्चे के पेट पर हल्का दबाव डालें, गैस को निकालने के लिए।
5. पैरों की मालिश:
पैरों की मालिश के लिए, हल्के हाथों से तेल लेकर उनके तलवों से शुरुआत करें।
पैर की उंगलियों और एड़ियों पर ध्यान दें और हल्के हाथों से मालिश करें।
6. सिर और चेहरे की मालिश:
शिशु के माथे पर तर्जनी उंगली रखें और चेहरे को हल्के हाथों से मालिश करें।
बालों की जड़ों में तेल लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें।
7. पीठ की मालिश:
पीठ की मालिश के लिए, बच्चे को पेट के बल लिटाएं और धीरे-धीरे ऊपर की ओर मालिश करें।
रीढ़ की हड्डी पर ध्यान दें और हल्के हाथों से मालिश करें।
मालिश करने के लिए सही पोजीशन है जरुरी:
शिशु को मालिश करते समय सही स्थिति में रखें। उन्हें पर्याप्त सहारा दें ताकि वे बिना चिंता के आराम से स्थिति में बने रह सकें।
हरिताभ्यंग (गेंदा तेल): कुछ अध्ययनों में दिखाया गया है कि हरिताभ्यंग या गेंदा तेल की मालिश से शिशु की त्वचा का विकास अधिक होता है। यह उनकी त्वचा को नरम और सुंदर बनाने में मदद करता है।
नवजात शिशु की मालिश किन-किन तेल से कर सकते है.
बच्चे की मालिश के लिए कुछ सुरक्षित और प्रभावी तेलों का उपयोग किया जा सकता है। यहाँ कुछ ऐसे तेलों की सूची है जो बच्चों की मालिश के लिए उपयुक्त हो सकते हैं:
- सरसो तेल (Mustard Oil): सरसो तेल भारतीय घरों में बच्चों की मालिश के लिए प्रसिद्ध है। पहले के ज़माने से सरसो का तेल ही शिशु की मालिस करने के लिए उत्तम माना गया है। यह उनकी त्वचा को नर्म और मुलायम बनाता है और उनके शारीरिक विकास को समर्थित करता है।
- कोकोनट तेल (Coconut Oil): कोकोनट तेल एक और सुरक्षित विकल्प है जो बच्चों की मालिश के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह त्वचा को मृदु और चिकना बनाता है और उसको नमी से भर देता है।
- अल्मंड तेल (Almond Oil): अल्मंड तेल में विटामिन ई की अधिक मात्रा होती है, जो त्वचा के लिए उत्तम होती है। यह त्वचा को नरम, चमकदार और स्वस्थ बनाता है।
- ऑलिव तेल (Olive Oil): ऑलिव तेल भी बच्चों की मालिश के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें विटामिन ई और ए जैसे पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं।
- जोजोबा तेल (Jojoba Oil): यह तेल अत्यंत मिल्ड होता है और बच्चों की त्वचा को संतुलित और नरम बनाए रखता है। यह त्वचा के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प हो सकता है।
नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें से जुडी जानकारी जानने के लिए इसे पढ़े- नवजात शिशु की देखभाल नई माताओं के लिए
कई महिलाओं को प्रेगनेंसी में क्या खाना है और क्या नहीं इस बात की जानकारी नहीं होती। अगर आप इसकी जानकारी जानना चाहते है तो आप इसे पढ़े – आप भी हैं प्रेगनेंट तो भूलकर भी न खाएं ये दो फल नहीं तो हो सकता है मिसकैरेज
नवजात शिशु की मालिश कैसे करें से जुड़े प्रश्न/उत्तर
बच्चे की मालिश एक दिन में कितनी बार कर सकते है?
बच्चे की मालिश एक दिन में आप 2 से लेकर 3 बार कर सकते है।
नवजात शिशु की चेहरे की मालिश करने का तरीका क्या है?
नवजात शिशु की चेहरे की मालिश करने के लिए आप सबसे पहले बच्चे के एब्रो से लेकर थुड़ी तक दिला का शेप बनाकर मालिश करें।
न्यू मॉम्स को कितने मिनट तक नवजात शिशु की मालिश करनी चाहिए?
न्यू मॉम्स को 20 से लेकर 30 मिनट तक नवजात शिशु की मालिश करनी चाहिए।
नवजात शिशु की मालिश कब से कब तक करनी चाहिए?
नवजात शिशु की मालिश आप बच्चे की गर्भनाल उतरने के बाद से शुरू कर सकती है और आप जब तक चाहे बच्चे की मालिश कर सकते है।
नवजात शिशु की मालिश के लाभ के बारे में अनेक अध्ययन हो चुके हैं जिनसे पता चलता है कि इसका नियमित अभ्यास उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए फायदेमंद होता है। मालिश से शिशु की त्वचा को रक्षा की जा सकती है, उनकी तानाशाही और मांसपेशियों का विकास होता है, साथ ही उनकी नींद भी सुधारती है। इसके अलावा, मालिश शिशु के मातृत्व और पितृत्व के साथ संबंध को भी मजबूत करती है।