शिशु को जरूरत से ज्यादा दूध पिला रही हैं? इन 5 संकेतों को नजरअंदाज ना करें!

आपका शिशु बार-बार उल्टी कर रहा है, पेट फूल रहा है या रोने की आदत बढ़ गई है? हो सकता है कि आप उसे जरूरत से ज्यादा दूध पिला रही हों। जानिए उन जरूरी संकेतों के बारे में, जो बताते हैं कि शिशु को सही मात्रा में दूध मिल रहा है या नहीं!

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By Nutan Bhatt

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श‍िशु को बहुत ज्यादा दूध तो नहीं पिला रहीं आप? इन संकेतों से पहचानें

शिशु को दूध पिलाना उसकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा दूध पिलाने से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ओवरफीडिंग से शिशु के पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है, जिससे वह असहज महसूस कर सकता है। यदि आपका शिशु बार-बार उल्टी कर रहा है, पेट फूल रहा है, या बार-बार रो रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि वह जरूरत से ज्यादा दूध का सेवन कर रहा है।’

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शिशु को अधिक दूध पिलाने के संकेत

शिशु की देखभाल करते समय यह समझना जरूरी है कि कहीं आप उसे ओवरफीड तो नहीं कर रही हैं। इसके कुछ स्पष्ट संकेत होते हैं:

शिशु यदि हर बार दूध पीने के बाद उल्टी करता है या दूध बाहर निकालता है, तो यह संकेत हो सकता है कि उसका पेट जरूरत से ज्यादा भर चुका है। अधिक दूध के कारण शिशु के पेट में गैस बनने लगती है, जिससे वह असहज महसूस करता है। यह समस्या विशेष रूप से बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं में अधिक देखने को मिलती है।

अत्यधिक दूध पीने के कारण शिशु में चिड़चिड़ापन और बेचैनी भी बढ़ सकती है। वह बार-बार रो सकता है या अनावश्यक रूप से परेशान दिख सकता है। इसका कारण यह हो सकता है कि उसका पेट जरूरत से ज्यादा भरा हुआ हो, जिससे उसे असुविधा हो रही हो।

कुछ शिशु जिन्हें अत्यधिक दूध पिलाया जाता है, वे बार-बार ढीला मल त्यागते हैं। यह स्थिति तब होती है जब उनका पाचन तंत्र सही से काम नहीं कर पाता और अतिरिक्त दूध को पचाने में कठिनाई होती है। यदि शिशु का वजन असामान्य रूप से तेजी से बढ़ रहा है, तो यह भी ओवरफीडिंग का एक लक्षण हो सकता है।

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विशेषज्ञों की राय

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ओवरफीडिंग से बचने के लिए माता-पिता को शिशु के फीडिंग पैटर्न को समझना बहुत जरूरी है। डॉ. निधि शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ कहती हैं, “अक्सर माता-पिता यह समझते हैं कि जब भी बच्चा रोता है, तो वह भूखा होता है। लेकिन हर बार रोने का कारण भूख नहीं होता। कई बार शिशु आराम, गोद में रहने या किसी और कारण से रोता है। इसलिए माता-पिता को शिशु के अन्य संकेतों को भी समझना चाहिए।”

डॉ. राहुल मेहरा, पीडियाट्रिशियन का कहना है, “अगर शिशु दूध पीने के तुरंत बाद उल्टी करता है या बार-बार गैस और पेट फूलने की समस्या से परेशान रहता है, तो यह संकेत हो सकता है कि उसे जरूरत से ज्यादा दूध दिया जा रहा है। बेहतर होगा कि हर फीडिंग के बाद शिशु को थोड़ा समय upright पोजीशन में रखा जाए, जिससे दूध सही तरीके से पच सके।”

वहीं, डॉ. सुमेधा गुप्ता, न्यूट्रीशनिस्ट, कहती हैं, “माताओं को यह समझना चाहिए कि दूध के अलावा शिशु के स्वास्थ्य के लिए सही मात्रा में ठोस आहार देना भी जरूरी होता है, जब वह 6 महीने से अधिक का हो जाए। लगातार दूध पिलाने से उसका पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है और उसे ठोस भोजन अपनाने में कठिनाई हो सकती है।

ओवरफीडिंग से बचने के उपाय

शिशु को जरूरत से ज्यादा दूध पिलाने से बचने के लिए सबसे पहले उसकी भूख के सही संकेतों को पहचानना जरूरी है। हर रोना भूख का संकेत नहीं होता, इसलिए उसे दूध पिलाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह वास्तव में भूखा है या किसी अन्य कारण से रो रहा है।

इसके अलावा, फीडिंग का एक नियमित शेड्यूल बनाएं ताकि शिशु की जरूरत के अनुसार ही उसे दूध मिले। जब भी शिशु दूध पीना बंद कर दे या अनावश्यक रूप से चूसना शुरू कर दे, तो समझ जाएं कि उसका पेट भर चुका है। बोतल से दूध पिलाने के दौरान विशेष ध्यान रखें कि उसे जबरदस्ती दूध न पिलाया जाए।

(FAQs)

1. शिशु को कितना दूध देना चाहिए?
यह शिशु की उम्र और वजन पर निर्भर करता है। आमतौर पर नवजात शिशु को हर 2-3 घंटे में दूध देना सही माना जाता है।

2. ओवरफीडिंग होने पर क्या करें?
अगर शिशु में ओवरफीडिंग के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। दूध की मात्रा और फीडिंग का अंतराल सही करना जरूरी है।

3. क्या ओवरफीडिंग से शिशु का वजन बढ़ सकता है?
हां, जरूरत से ज्यादा दूध पीने से शिशु का वजन तेजी से बढ़ सकता है, जिससे आगे चलकर मोटापे की समस्या हो सकती है।

4. अगर शिशु हर समय दूध मांगता है तो क्या करें?
कभी-कभी शिशु सिर्फ आराम के लिए दूध मांगता है। ऐसे में अन्य तरीकों से उसे शांत करने की कोशिश करें, जैसे गोद में लेना या हल्के संगीत का सहारा लेना।

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Nutan Bhatt
मैं नूतन भट्ट हूँ, शिवांग की माँ और mumbabysparsh.com की संस्थापक। एक नई माँ के रूप में, मैंने अपनी मातृत्व यात्रा के दौरान सीखे गए सबक और अनुभवों को साझा करने का फैसला किया। मेरा लक्ष्य है अन्य नई माओं को प्रेरित करना और उनकी मदद करना, ताकि वे इस चुनौतीपूर्ण और खुशियों भरी यात्रा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें। मेरे लेख बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, और मातृत्व के सुखद अनुभवों पर केंद्रित हैं, सभी को हिंदी में सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है। मैं आशा करती हूँ कि मेरे विचार और सुझाव आपकी मातृत्व यात्रा को और अधिक खुशहाल और सुगम बनाने में मदद करेंगे।

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